Indian Railway Finance Corporation (IRFC) भारतीय रेलवे की वित्तीय संस्थान है, जिसकी स्थापना 1986 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय रेल के लिए धन जुटाना और रेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। हाल ही में IRFC ने पतरातू विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (PVUNL), जो NTPC की सब्सिडियरी है, को झारखंड के लातेहार जिले के बनहरडीह कोल ब्लॉक के विकास के लिए ₹3388.51 करोड़ का लोन मंजूर किया है। PVUNL पतरातू में 4000 मेगावाट का कोल बेस्ड पावर प्रोजेक्ट दो चरणों में बना रही है
इस लोन का मुख्य उद्देश्य PVUNL के पतरातू पावर प्रोजेक्ट के लिए ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित करना और रेलवे से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करना है। बनहरडीह कोल ब्लॉक में अनुमानित 956 मिलियन टन कोयले का भंडार है, जो इसी पावर प्रोजेक्ट में इस्तेमाल होगा। इसके अलावा, इस कोयले को भारतीय रेलवे नेटवर्क के माध्यम से ट्रांसपोर्ट किया जाएगा, जिससे रेलवे क्षेत्र के साथ मजबूत कनेक्टिविटी बनाए रखने में मदद मिलेगी
IRFC की भूमिका
IRFC ने हाल ही में “Navratna” का दर्जा प्राप्त किया है और यह अब सिर्फ रेलवे परियोजनाओं ही नहीं बल्कि पावर जेनरेशन, कोयला, खनन, वेयरहाउस, पोर्ट्स, लॉजिस्टिक्स आदि क्षेत्रों में भी फंडिंग कर रहा है। कंपनी की खासियत है कि इसकी बैलेंस शीट बहुत मजबूत है और अभी तक इसके पोर्टफोलियो में कोई NPA (फंसा हुआ कर्ज़) नहीं है
IRFC शेयर का हाल
यह भी पढ़ें : सोमवार को ग्रीन एनर्जी के इस शेयर में आयेगी तूफानी तेजी ! Racemosa Energy की 76% हिस्सेदारी किया अपने नाम
26 सितंबर 2025 को IRFC का शेयर मूल्य 121.91 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में इसमें लगभग 22% की गिरावट आई है, जबकि पिछले 3 वर्षों में इसमें 483% की बढ़त देखने को मिली है। कंपनी का मार्केट कैप 1,59,318 करोड़ रुपये है। इसका 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 166.90 रुपये और न्यूनतम 108.04 रुपये रहा है
कंपनी के वित्तीय परिणाम
यह भी पढ़ें : Suzlon की तरह रिटर्न दे सकता है ग्रीन एनर्जी का ये शेयर ! 73% उछला भाव, क्या आप लगायेंगे दाव?
2025 की दूसरी तिमाही में IRFC की कुल आय 6,900 करोड़ रुपये रही, जिसमें शुद्ध लाभ (PAT) 1,612 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का नेट प्रॉफिट मार्जिन लगभग 24% है, जो फाइनेंस कंपनियों के लिए काफी अच्छा है.
शेयरहोल्डिंग पैटर्न
IRFC में सरकारी प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 86.36% है, बाकी हिस्सा विभिन्न निवेशकों, म्यूचुअल फंड्स और व्यक्तिगत निवेशकों के पास है। पिछले कुछ तिमाहियों में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (FII) और म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी में हल्की बढ़ोतरी देखी गई है












