Motilal Oswal (MOFSL) के प्रीव्यू के मुताबिक Suzlon Energy की सितंबर तिमाही (Q2 FY26) में साल-दर-साल लगभग 32% की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ दिख सकती है, लेकिन शुद्ध लाभ पिछले साल के मुकाबले लगभग फ्लैट रहने का अनुमान है. रेवेन्यू लगभग ₹2,785 करोड़ तक रहने का अनुमान है, EBITDA करीब ₹422.5 करोड़ और EBITDA मार्जिन लगभग 15% के आसपास आ सकता है. PAT लगभग ₹199–200 करोड़ के पास रह सकता है, जो पिछले साल के ₹200 करोड़ के बराबर ही है. ब्रोकरेज ने शेयर पर ₹80 का टारगेट बनाए रखा है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 40–45% की संभावित अपसाइड दिखाता है
Q2 में ऑर्डर एग्जिक्यूशन और सेगमेंट परफॉर्मेंस
कंपनी ने इस तिमाही में लगभग 365 MW विंड टर्बाइन प्रोजेक्ट्स का एग्जिक्यूशन माना है, जो साल-दर-साल 42% की वृद्धि है, हालांकि तिमाही-दर-तिमाही 18% कम है. इसका मतलब है कि इंस्टॉलेशन की रफ्तार सालाना आधार पर तेज है, लेकिन पिछले क्वार्टर की तुलना में थोड़ी सुस्त रही. उच्च एग्जिक्यूशन के बावजूद नेट प्रॉफिट फ्लैट रहने का मुख्य कारण इनपुट कॉस्ट, लॉजिस्टिक्स, सर्विस बिजनेस मिक्स और फाइनेंस कॉस्ट/वन-ऑफ्स का प्रभाव हो सकता है, जबकि ऑपरेटिंग लेवरेज से मार्जिन सपोर्ट मिला है
ऑर्डर बुक
सितंबर में Tata Power Renewable Energy से 838 MW का बड़ा ऑर्डर मिला है, जो इस वित्त वर्ष का सबसे बड़ा और कंपनी के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा ऑर्डर है. इस प्रोजेक्ट में 266 यूनिट S144 विंड टर्बाइन (प्रत्येक 3.15 MW) लगेंगे और लोकेशन कर्नाटक (302 MW), महाराष्ट्र (271 MW) और तमिलनाडु (265 MW) में फैली हैं. यह प्रोजेक्ट Firm and Dispatchable Renewable Energy (FDRE) बिड्स के अंतर्गत है, जो रिन्यूएबल पावर को राउंड-द-क्लॉक उपलब्ध कराने के लिए हाइब्रिड और स्टोरेज इंटीग्रेशन पर फोकस करता है. इससे Suzlon की ऑर्डर बुक और FY26–FY27 की विजिबिलिटी मजबूत हुई है
इंडिया की पावर कैपेसिटी और RE ट्रेंड्स
भारत की कुल इंस्टॉल्ड पावर कैपेसिटी अगस्त 2025 के अंत तक लगभग 495–489 GW के दायरे में बताई गई है, जिसमें रिन्यूएबल और हाइड्रो मिलाकर RE+Hydro लगभग 242 GW तक पहुंच चुका है. सिर्फ रिन्यूएबल (हाइड्रो छोड़कर) कैपेसिटी ~192 GW के आसपास है. साल 2025 के पहले आठ महीनों में सोलर की इंस्टॉलेशन तेज रही है और कुल RE मिक्स में सोलर का योगदान सबसे बड़ा रहा है. यह बैकड्रॉप विंड-सोलर हाइब्रिड और FDRE प्रोजेक्ट्स के लिए पॉजिटिव डिमांड एनवायरनमेंट बनाता है, जिसका फायदा Suzlon जैसे OEMs को मिलता है.
शेयरहोल्डिंग
Suzlon एक रिटेल-हेवी स्टॉक बना हुआ है. जून क्वार्टर के अंत में लगभग 55.4 लाख रिटेल निवेशक कंपनी में हिस्सेदारी रखते थे, जिनका कुल शेयरहोल्डिंग में लगभग 25% हिस्सा था. हाई रिटेल पार्टिसिपेशन से सेंटीमेंटल मूवमेंट तेज हो सकते हैं, इसलिए ब्रोकरेज हाउसेज आमतौर पर टेक्निकल और फंडामेंटल दोनों पैरामीटर्स पर सतर्क रहने की सलाह देते हैं
टेक्निकल मूवमेंट
हालिया टेक्निकल एनालिसिस के अनुसार स्टॉक में डेली चार्ट पर लोअर-टॉप, लोअर-बॉटम का पैटर्न दिखा है और RSI में कमजोरी का संकेत है. कुछ विश्लेषकों ने निकट अवधि में 58 के आसपास स्टॉप-लॉस के साथ 49–46 के संभावित टेस्ट की बात कही थी. हालांकि, फंडामेंटल साइड पर बड़े ऑर्डर्स और एग्जिक्यूशन पिक-अप के चलते मध्यम अवधि का व्यू सपोर्टेड बना हुआ है. निवेश निर्णय लेते समय टेक्निकल ट्रेंड और फंडामेंटल ट्रिगर्स दोनों को साथ में देखना बेहतर रहता है.
ब्रोकरेज व्यू और टारगेट
Motilal Oswal ने Suzlon पर ‘Buy’ रेटिंग दोहराते हुए ₹80 का टारगेट रखा है. यह टारगेट FY27E अर्निंग्स पर लगभग 35x P/E के आधार पर है, जो कंपनी के दो-वर्षीय फॉरवर्ड एवरेज 27x से थोड़ा प्रीमियम है. ब्रोकरेज का मानना है कि लोकल कंटेंट और ALMM जैसी नीतियां, EPC शेयर का बढ़ना, लैंड एक्विजिशन में सुधार और बड़े NTPC/Tata Power जैसे ऑर्डर्स कंपनी की एग्जिक्यूशन और अर्निंग्स विजिबिलिटी को सपोर्ट करेंगे. NTPC Green के 1,544 MW जैसे मेगा ऑर्डर और FY26 में ~4 GW तक नए ऑर्डर्स की संभावनाएं, क्लोजिंग ऑर्डर बुक को ~6.5 GW तक ले जाने का रोडमैप बनाती हैं.
Q1 FY26 परफॉर्मेंस और रन-रेट संकेत
Q1 FY26 में Suzlon ने लगभग ₹324 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था, जो साल-दर-साल करीब 7% बढ़ा. यह दिखाता है कि प्रॉफिटेबिलिटी ट्रेंड पॉजिटिव है, हालांकि तिमाही-दर-तिमाही प्रोजेक्ट माइलस्टोन्स के कारण वोलैटिलिटी रह सकती है. Q2 के प्रीव्यू में भी यही ट्रेंड दिखता है कि रेवेन्यू स्ट्रॉन्ग है पर प्रॉफिट फ्लैट है, जिससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी और कॉस्ट मैनेजमेंट पर मैनेजमेंट फोकस का संकेत मिलता है
FDRE और S144 प्लेटफॉर्म की स्ट्रैटेजिक इंपोर्टेंस
FDRE मॉडल में विंड, सोलर और स्टोरेज का कॉम्बिनेशन होता है ताकि लगातार और डिस्पैचेबल ग्रीन पावर उपलब्ध कराया जा सके. Suzlon का S144 प्लेटफॉर्म 3.15 MW रेटेड कैपेसिटी के साथ अलग-अलग विंड कंडीशंस में बेहतर आउटपुट देने के लिए डिजाइन किया गया है. बड़े पैमाने के FDRE प्रोजेक्ट्स में ऐसे हाई-रेटेड टर्बाइंस से लेवलाइज्ड कॉस्ट ऑफ एनर्जी को कम करने और एग्जिक्यूशन को तेज करने में मदद मिलती है. Tata Power Renewable के 838 MW प्रोजेक्ट में S144 का व्यापक इस्तेमाल कंपनी की टेक्नोलॉजी एडॉप्शन और सप्लाई स्केल दर्शाता है.
निकट भविष्य में Suzlon के लिए प्रमुख ट्रिगर्स Q2 FY26 के वास्तविक रिजल्ट्स, नए FDRE/हाइब्रिड टेंडर्स की प्रोग्रेस, NTPC/SECI/राज्य बिड्स में विन रेशियो, और EPC शेयर में बढ़ोतरी रहेंगे. सेक्टर स्तर पर भारत की बढ़ती RE कैपेसिटी, ट्रांसमिशन अपग्रेड्स और RPO/ALMM जैसी नीतिगत सपोर्ट से डिमांड पाइपलाइन मजबूत दिखती है. वैल्यूएशन के लिहाज से ब्रोकरेज का टारगेट अभी भी अपसाइड दिखाता है, लेकिन निवेशकों के लिए प्रॉफिटबुकिंग मूव्स, इनपुट कॉस्ट, सप्लाई-चेन और प्रोजेक्ट टाइमलाइन जैसे फैक्टर्स पर नजर रखना जरूरी है.
नोट: यह लेख सूचना के उद्देश्य से है. स्टॉक मार्केट में निवेश जोखिम के अधीन होता है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें.
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